25 फर्जी कम्पनियां और यादव सिह के आनन्द कुमार व ललित विक्रम बसंतवानी से जुडते तार

सम्मानीय बन्धुओं,
मौलिक भारत ट्रस्ट पिछले पन्द्रह दिनों से लगातार उ0प्र0 के गौतमबुद्धनगर जिले में स्थित नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे में चल रहे घोटालों, निलंबित, इंजीनियर यादव सिंह की करतूतें एवं किये गये घोटालों की पर्ते उधेड रहा हैं। इसी संदर्भ में हम दिनांक 29.11.2014 व 06.12.2014 को नोएडा में प्रेसवार्ता भी कर चुके हैं। यह सुखद है कि हमारी मांग व दबाव के फलस्वरुप अब इन तीनों प्राधिकरणों में रू0 10 लाख एवं इससे अधिक के ठेके ई-टेन्डिरिंग के अन्र्तगत आये है। साथ ही उ0प्र0 सरकार भी हरकत में आयी है व अन्य संदेहास्पद अधिकारियों के खिलाफ जाँच भी शुरू की एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति सचेत हुए हैं। यह भी सुखद है कि हमारी मांग उठाने के कुछ घंटों बाद ही कालाधन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित एसआईटी ने तीनों प्राधिकरणों के घोटालों को अपनी जांच के दायरे में ले लिया है।

किन्तु हमें लगता है कि जांच को जिस तीव्रता की आवश्यकता है वह उतनी नहीं है। जांच ऐजेन्सियों कुछ लोगों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रही हैं किन्तु यह पर्याप्त नहीं है। लाखों, करोडों के इन घोटालों में यादव सिंह तो एक मोहरा व मुखौटा मात्र है और असली घोटालेबाज एवं अपराधी अभी भी खुले आम धूम रहे हैं। ऐसे में एक अलग एसआईटी जिसमें सभी तरह की जांच ऐजेन्सियों के लोग शामिल हों और वह उच्च या उच्च्तम न्यायालय की निगरानी में गठित की जाये । हम यह मांग करते हैं कि इस दिशा में उ0प्र0 सरकार पहल करे और इसीलिए हम यह पे्रसवार्ता लखनऊ में कर रहे हैं। यह मामला कितना गंभीर है यह हमारे अगले खुलासों से स्पष्ट हो जायेगा।

आपकी सूचना के लिए हम स्पष्ट करते हैं कि तीनों प्राधिकरणाों के अनेकों अधिकारियों की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हवाला व मनीलाॅड्रिग के मामलों में संलिप्तता जाँच के दायरे में है, जिसकी जानकारी दस्तावेज हमने अपनी पिछली प्रेस वार्ता में दिये थे। यादव सिंह की जून 2014 में बहाली हुई एवं 12 नवम्बर 2014 को तीनों प्राधिकरणों का इंजीनियर-इन-चीफ बनाया गया था और अपने इस दूसरे कार्यकाल में उसने सैकड़ों टेंडर स्वीकृत किये तथा बडी मात्रा में रूके हुए भुगतान भी जारी किये। हमें यह सभी संदिग्ध व मिली भगत का खेल लगते हैं और इन सभी टेंडरों व भुगतान को रद्द करने की मांग करते हुए इस खेल मे ंसलिप्त सभी लोगों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की मांग करते हैं।

25 फर्जी कम्पनियां और यादव सिह के आनन्द कुमार व ललित विक्रम बसंतवानी से जुडते तार-

पिछली पे्रस वार्ता में हमने यादव सिंह से जुडी कुछ कम्पनियों के नाम आप लोगों को बताये अब फिर हम 25 और कम्पनियों की सूची जारी कर रहे हैं। ये सभी कम्पनियां संदिग्ध है और हमारा अनुमान है कि फर्जी बोगस तथा जालसाजी में लिप्त हैं तथा इन सभी कम्पनियों में तीन महिलाओं कुसुमलता, अल्का विक्रम तथा विचित्रलता के नाम जुडे हैं। इन तीनों महिलाओं के पति निम्न प्रकार हैः-

1. कुसुम लता पत्नी यादव सिंह (निलंबित इंजीनियर-इन-चीफ)

2. अल्का विक्रम पत्नी ललित विक्रम बसंतवानी (महाप्रबन्धक वित, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सपे्रसवे विकास प्राधिकरण)

3. विचित्रलता पत्नी आनन्द कुमार (उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य मंत्री मायावती के भाई)
ऽ कौन है ललित विक्रम:- अलका विक्रम जो उन्नति इन्फ्राटेक प्रा0 लि0 की निदेशक व प्रमोटर के पति ललित विक्रम बसंतवानी ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरणों के महाप्रबनधक (वित्त) रहे हैं। इससे पूर्व यह व्यक्ति सेक्टर-62 नोएडा स्थित यूनियन बैंक आॅफ इंडिया मे अधिकारी था। उल्लेखनीय है कि इसी शाखा मे नोएडा प्राधिकरण क बैंक खाते हैं और यही बैंक शाखा प्राधिकरण के टेंडर फार्म भी जारी करती रही हैं। यह बैंक अधिकारी यादव सिंह के घोटालों व कारनामों को अंजाम देने वाला प्रमुख वित्तीय सूत्रधार था तीनों प्राधिकरणों के अधिकांश घोटालों में इस व्यक्ति की कहीं न कहीं संलिप्ता जरुर हैं क्योंकि यह प्राधिकरणों की ब्राशर एवं टेंडर फार्मो को जारी व स्वीकार करने के खेल में यादव सिंहध् आनंद कुमार के ईशारे पर हेराफेरी करता था।

aआनन्द कुमार (भाई पूर्व मुख्यमंत्री उ0प्र0 मायावती) एवं उनकी पत्नी विचित्रलता के अनेकों कम्पनियों में नाम व भागीदारी इस राजनीतिक परिवार की इन घोटालों में संलप्तिता को उजागर कर रहे हैं। जिसकी गहन जांच व कडी कार्यवाही बहुत ही आवश्यक हैं।

एयरलाईन्स कम्पनी बनाकर बडी मात्रा में हवाला के जरिये कालेधन का निवेश-

हम आपको एक और कम्पनी इंडियाना एयर प्राईवेट लिमिटेड के पंजीकरण प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध करा रहे हैं। यह कम्पनी भी यादव सिंह ध् आनंद कुमार ध् ललित विक्रम बसंतवानी सिंडीकेट से जुडी हुई हैं। हमारी गहन जांच से यह तथ्य सामने आया हैं कि एयर लाईन्स बनाने के नाम पर इस कम्पनी के लेने देने के तार मारीशस रुट से भी जुड़े होने की संभावना है और इसका मुख्य उद्देश्य कालेधन को सफेद बनाना था। इस कम्पनी को कारपोरेट मंामलों के मंत्रालय से पांच प्रकार के व्यवसाय करने की मंजूरी मिली हुई हैं। इसकी गहन जांच जरुरी हैं।

बंधुओं दुखद हैं कि संसद के चालू सत्र में लाखों करोड के इन घोटालों पर ढंग से चर्चा तक नहीं हुई हैं जनता के लाखों करोड लूटने वालों व प्रदेश में वित्तीय अराजकता पैदा करने वाले इस घोटाले पर हम सभी संसद सदस्यों द्वारा संसद में विशेष चर्चा की मांग करते है और साथ ही प्रदेश सरकार से अपील करते हैं कि इन घोटालों पर चर्चा के लिए और प्रभावी कानूनों के निर्माण के लिए तुरन्त विधान सभा का विशेष सत्र बुलाये। ऽ बंधुओं हम यह भी मांग करते हैं कि प्रदेश के सभी अन्य प्राधिकरणों के कार्यों की समीक्षा व अधिकारियों की जांच हो क्योंकि इनमे ंभी अक्सर अनियमितताओं की शिकायते आती रहती हैं। ऽ सभी प्राधिकरणों के निर्णय प्रक्रिया मे चुने हुए प्रतिनिधिओ की भी भागे दारी होे। ऽ सभी अधिकारियों , कर्मचारियों, ठेकेदारों, बिल्डरों, राजनेताओं व मंत्रियों जिन्होंने इन घोटालों की अनदेखी की या जिनकी लिप्तता इन घोटालों में है उन्हें बर्खस्त कर गिरफ्तार किया जाये व उचित कानूनी कार्यवाही उनके खिलाफ कर जाये। ऽ उच्च या उच्चतम न्यायालय की देख रेख मे विशेष एस0आई0टी0 का गठन तुरन्त प्रभाव से किया जाये जो निर्धारित समय के अन्दर पारदर्शी तरीके से अपनी जांच सरकार को दे और सच्र्चाइ समाने आ सके।

अनुज अग्रवाल (महा सचिव)
कैप्टन विकास गुप्ता (उपाध्यक्ष)
संजय शर्मा (केन्द्रीय कार्यालय प्रभारी)


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